चुदक्कड़ घोड़ियाँ – 2

बस वो थोड़ी सांवली थी. उसके चूतड़ मम्मी की ही तरह काफी चौड़े और लचीले लग रहे थे.

भोंदू उस औरत को बड़ी बुरी तरह से चोद रहा था. भोंदू उस औरत के चूतडों को बड़े ही अजीब ढंग से सहला रहा था और नोच खसोट रहा था.

भोंदू लगभग अपने पंजों पर खड़ा होकर उस औरत को अपने तगड़े लंड से चोद रहा था. उस औरत की चीखने और रम्भाने की आवाज़ सबसे ज्यादा आ रही थी.


“हाययय…….भोंदू…..मरर…ररर…..गग..यी……..री…………ऊऊऊ………ऊऊऊ……..धीरे बेटा ……….धी ई ई .रे.रे……आआय्य्य्य………..आह्ह्ह्हह्ह……..उईई…..उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़……..तू……..तो ………आज्ज्ज……मार ररर डालेगा गा गा …..रे……….”
“बेटा” सुन के तो मैं चोंक गयी. ये कौन कुतिया है जो भोंदू को बेटा कह रही है?


“हाय……मुन्ना…………उफ्फ्फफ्फ्फ़…….कितन बेरहमी से चोद रहा है ये लड़का……….उफ्फ्फ्फफ्फफ्फ्फ़………मर गयी……….धीरे कर नालायक……कक्क ……” वो औरत लगभग सुबक रही थी.

उसकी काफी ज़ोर से चुदाई हो रही थी. भोंदू ने उस नंगी औरत का बैंड बजा रखा था और लगभग कूदते हुए चोद रहा था उस कुतिया को.

भोंदू चोदने के साथ साथ उस औरत के नंगे चूतडों को नोच खसोट भी रहा था जिसकी वजह से वो औरत और ज्यादा चीखें मार रही थी पर शायद मज़े से.


“अबे भोंदू……..फाड़ मत दियो इस कुतिया की गांड……….अभी मैं भी चोदुंगा और नंदू भी”……….मुन्ना काका मम्मी को चोदते हुए भोंदू की तरफ देख कर बोले………काका ने अपना सीधा हाथ मम्मी की कमर से हटाया और शायद उस औरत को पुचकारने लगे……..


“मज़ा आ रहा है भाभी की नहीं?…………मुझे तो बड़ा मज़ा आ रहा है. सुधिया मैडम और गीता को तो कई बार एक साथ चोदा है पर तीन औरतों को चोदने का ये पहला मोका है. उफफ्फ्फ्फ़……….क्या मस्ती आ रही है………ले रंडी ले……..हुऊंन्न्न हुन्न्न्नन्न……..” काका मम्मी की चूत में बेदर्दी से धक्के मारते हुए उस अनजान औरत के बाल सहला रहे थे.


पर मुन्ना काका के मुंह से “भाभी” सुन के मेरे कान खड़े हो गए…….क्यूंकि भाभी तो वो सिर्फ हीरा काका की लुगाई रम्भा को ही कहते थे. मेरे दिल की धड़कन तेज़ हो गयी ये सोच कर क्यूंकि उस अनजान औरत को तो खुद हीरा काका का लड़का भोंदू चोद रहा था. और अगर वो सच में रम्भा है तो क्या भोंदू अपनी ही माँ को चोद रहा है……!!!!


“अरे भाईसाहब ………..उन्न्नन्न……….मज़ा तो आ रहा है पर इस कमीने का लंड तो आप से भी ज्यादा मोटा है………..उफ्फ्फ……..ऐसा लग रहा है जैसे मेरी गांड में कोई मोटा लठ दाल दिया हो……….हाय्यय्य्य……….आराम…………………………..से…………………………………. चोद………बे…….टा …………उईईईईईईईईईईईईईईईईईईई………..हाय…भाईसाहब आपने भी क्या सिखा दिया भोंदू और नंदू को…………इन कमीनो को तो गांड का छेद ही नज़र आता है अब दिन-रात………इनका बाप तो गांड में कभी ऊँगली भी नहीं डालता और ये दोनों तो जैसे गांड मारने के लिए हमेशा तैयार रहतें हैं”


“अरे भाभी ………हीरा क्या जाने कि गांड चोदने में कितना मज़ा आता है. मैंने तो उसे कई बार कहा कि अपनी लुगाई की गांड चोदा कर ……..देख कितना मज़ा आता है…….पर मानता ही नहीं साला……कहता है कि छी ….गन्दी होती है गांड.”………मुन्ना ने मज़े लेते हुए कहा.


“अरे चाचा………….उफ्फ्फ्फफ्फफ्फ्फ़………..बापू को कोई बताओ कि कितना आनंद आता है………….उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़……..चाचा ………बड़ा मज़ा आ रहा है इस गांड को चोदने में………..उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़……ह्न्न्नन्न्न्न …….ऐसा लग रहा है जैसे किसी गरम कददू में लंड घुसा रखा हो……….उफ्फ्फफ्फ्फ़………… “चटाक”…. “चटाक”…. “चटाक”…. “चटाक”…. “चटाक”…. “चटाक”…………..उफ्फ्फ…………बड़ा मज़ा आ रहा है………….री”


“भाईसाहब……….भोंदू तो सच में दीवाना हो गया है मेरी गांड का……………उफ्फ्फफ्फ्फ़…….कितना मज़ा दे रहा है……………हाययय…………धीरे चोद बेटा……….मैं कहीं भागी थोड़े ही जा रही हूँ……….आईई …….उन्ह्हह्ह्ह्हह्ह ………इतनी ज़ोर से थप्पड़ मारेगा तो गांड लाल हो जाएगी……..होले होले……थपकियाँ दे चूतड़ पे.”


इतना सुनते ही मैं चौक गयी ………..मैंने सुना था कि मर्द लोग औरत की गांड में भी लंड डालते है पर मैंने कभी भी मम्मी या दीदी की चुदाई देखते टाइम इस बात पर गौर नहीं किया था कि काका या नंदू, भोंदू उनकी चूत चोद रहे हैं या गांड. शायद इसलिए भी कि मैं सिर्फ दरवाजों की झुरियों से ही उन लोगों की चुदाई देख पाती थी. पर आज मैं बहुत करीब से ये चुदाई देख रही थी वो भी खुले दरवाज़े से.


उस गदराई गांड वाली अभी तक भी अनजान औरत की बातों से ऐसा लगा रहा था जैसे भोंदू उस औरत की गांड चोद रहा था.

और शायद इसलिए ही वो इस तरह ज़ोरों से सीसक रही थी. उसकी बात सुनके मेरी नज़रें अपने आप ही वहां चिपक गयीं जहाँ भोंदू का लंड उस मतवाली नंगी औरत के अंदर बाहर हो रहा था.

भोंदू दनादन चोद रहा था. उस औरत के नंगे चूतड़ मस्ती से हिल रहे थे. भोंदू उसके लचीले चूतडों को लगभग नोचता हुआ उसके पीछे लंड घुसा रहा था.

पर साइड व्यू होने के कारण और इतनी तेज़ चुदाई की वजह से मैं ये नहीं देख पा रही थी कि भोंदू का लंड चूत में घुसा है या उस औरत की गांड में.

पर फिर अचानक भोंदू की कमर थम गयी. उसने उस औरत के नंगे लचीले चूतड़ फैलाकर उस रंडी को थोड़ा पीछे को खिंचा.

झटके से खींचने की वजह से उस औरत के चूतड़ थोड़े मेरी तरफ़ घूम गए. अब सब कुछ साफ़ हो गया.

हाय रे………सच मुच भोंदू का तगड़ा लंड उस औरत की गांड में घुसा हुआ था.

भोंदू के लंड की लम्बाई मुझे अच्छी तरह से पता थी. मैं देखते ही समझ गयी कि भोंदू का आधा लंड उस औरत की गांड में घुसा हुआ था.

भोंदू का लंड वाकई किसी मोटे लम्बे खीरे जैसा है. उस औरत की गांड का छेद बुरी तरह से फैल कर लंड को जकड़े हुए था.

फिर भोंदू ने ऊपर से अपना मुंह खोल कर अपने थूक का एक बड़ा सा लौंदा उस औरत के चूतडों पर टपकाया और फिर बाएं हाथ से उसके चूतड़ फैलाये रखते हुए दायें हाथ की ऊँगली से उस थूक के लौंदे को उस औरत की गांड के छेद पर पंहुचा दिया.

थूक ने औरत की गुदा और उसमे घुसे लंड को बिलकुल तरर कर दिया. और भोंदू फिर से उस औरत की गांड ज़ोरों से चोदने लगा.“उन्न्नन्न्न्नन्न…………भाईसाहब……………हाय्य्यय्य्य्य कितना मज़ा आ रहा है…………..उन्नन….चोद बेटा चोद…………..हाय कितनी मस्ती भर गयी है मेरी इस चुदक्कड़ गांड में………..आआऔऊउन्न्न्न…………उन्न्नन्न…..”


लंड उस औरत को बड़ा मज़ा दे रहा था………उसकी आनंद भरी किलकारियां इसका सबूत भी थीं.

पर वो औरत भोंदू की माँ रम्भा थी इस बात को मेरा दिल बिलकुल मानने को तैयार नहीं था. कोई अपनी माँ को कैसे चोद सकता है………..और वो भी गांड में !


तभी भोंदू बड़ा उत्तेजित हो गया और उस औरत की गांड पे ज़ोरों से चपत लगाने लगा……तभी मैंने देखा की उस औरत की बाएं चूतड़ पे करीब 2 इंच चौड़ा एक बड़ा सा लस्सन था.

मुझे वो लस्सन जाना पहचाना लगा. मैंने वो एक दो बार तब देखा था जब रम्भा काकी खेतों में कभी कभी अपनी साड़ी और पेटीकोट उठा कर मेरी तरफ अपने चूतड़ करके मूतने के लिए बैठ जातीं थीं.

उनकी गोरी, नंगी और बेहद चौड़ी गांड दिल के आकार लिए हुए पेटीकोट से बाहर झांकती रहती थी. तभी मैंने उनके चूतड़ पे वो काला लस्सन देखा था. …………हे……..भगवान …………ये तो सच में रम्भा काकी है….!!!


मेरी पैरों तले की जमीन खिसक गयी. एक बेटा अपनी ही माँ की गांड मार रहा था. पर मेरा दिल फिर भी एक बार रम्भा काकी का चेहरा देखने का कर रहा था ताकि मुझे पूरा यकीन हो जाये.


और फिर जैसे भोंदू ने मेरी इच्छा ही पूरी कर दी. उसने उस औरत की गांड में एक ज़ोर का धक्का मारा और पूरा लंड जड़ तक उसकी गांड में घुसा दिया. वो ज़ोर से चीख़ पड़ी.

उसके बाद भोंदू ने उस औरत के ऊपर झुक कर उसकी दोनों जांघें पीछे से पकड़ लीं. मुझे लगा पता नहीं क्या कर रहा है.

और इतने में ही उस ताकतवर लड़के ने ज़ोर से उस औरत को कुर्सी से ऊपर उठा लिया.

उस औरत की पीठ भोंदू के सीने से चिपके थी और भोंदू का लंड उसकी गांड में घुसा था.

और भोंदू ने उसकी दोनों जांघों को आपस में चिपका कर नीचे से पकड़ रखा था.

वो औरत ठीक ऐसे लग रही थी जैसे कोई हवा में टट्टी करने के स्टाइल में बैठी हो. या जैसे भोंदू ने किसी टट्टी करती हुई औरत को उसी बैठे हुए देसी स्टाइल में उठा कर अपने लंड पर बिठा लिया हो.


“आआ…….ऊऊऊउ…………भोंन्न्न्नन्न्न्न………दू………गिर जाउंगी…………..हहह्हहीईईईईईए……” भोंदू के लंड पे इस तरह बैठने से उस औरत का बैलेंस बिगड़ने लगा तो वो थोड़ा घूमी और अपनी बाहें भोंदू के गले में दाल दी…………जैसे ही वो घूमी………..मेरे होश उड़ गए…………..वो कुतिया………रम्भा ही थी !! एक 40 साल की अधेड़ औरत बिलकुल नंगी अपने सगे बेटे की गोद में चढ़ कर अपनी गांड चुदवा रही थी.

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